सदन की शुरूआत होते ही CJP प्रोटेस्ट में छात्रों के साथ हुई पुलिस की बर्बरता और हिंसक बर्ताव को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव गरजते हुए दिखाई दिए। स्पीकर के सामने अखिलेश यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि- “यह मुद्दा समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी का नहीं है, यह मुद्दा युवाओं छात्र और नौजवानों का है। क्या बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे आप? युवाओं के लिए सदन में क्यों नहीं बोल सकते हैं।”
भेदभाव करने पर अखिलेश ने जताई नाराज़गी
NEET पेपर लीक के आरोप व विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस की हिंसक कार्रवाई के मुद्दे से लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई। सदन में उपस्थित समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने विपक्षी दलों के साथ भेदभाव करने पर नाराज़गी जताई। इस दौरान अखिलेश काफी गुस्से में दिखे और बोले- ”यह कांग्रेस, समाजवादी पार्टी या BJP का मुद्दा नहीं है। यह युवाओं और छात्रों का मुद्दा है।”
हमने सिर्फ 1 मिनट का मांगा समय
सरकार और कांग्रेस को बोलने की इजाज़त दी गई। लेकिन समाजवादी पार्टी को नहीं। स्पीकर को घेरते हुए अखिलेश ने मिलीभगत का आरोप भी लगाया। अखिलेश ने कहा कि हमने सिर्फ़ एक मिनट का समय मांगा था। उसे क्यों मना कर दिया गया?” यह विवाद पार्टी की राजनीति से ऊपर है और असल में लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने कहा, “नहीं, यह सही तरीका नहीं है। हम सभी छात्रों के लिए लड़ रहे हैं। अगर उनकी बात यहाँ नहीं सुनी गई, तो हमें सड़कों पर उतरना पड़ेगा।”
हमें मजबूरी में प्रधानमंत्री आवास जाना पड़ा
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सदन में अखिलेश यादव ने अपनी बात रखते हुए आगे कहा कि- हमें मजबूरी में प्रधानमंत्री आवास जाना पड़ा. हमारी बातें सुन लेते तो हम वहां क्यों जाते? स्पीकर साहब अगर आप हमें बोलने देते तो हम प्रधानमंत्री आवास नहीं जाना पड़ । यह मुद्दा बीजेपी -कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का नहीं बल्कि युवाओं का है। यह विवाद पार्टी की राजनीति से ऊपर है और छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। यह सही तरीका नहीं है। हम सभी छात्रों के लिए लड़ रहे हैं। अगर उनकी बात यहां नहीं सुनी गई, तो उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”
पुलिस ने छात्रों पर दिखाई ज्यादा सख्ती
सदन में अखिलेश यादव ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि 20 जून को संसद मार्च के दौरान विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बहुत ज़्यादा सख़्ती दिखाई। छात्रों को पीटा गया, उनके हाथ तोड़े गए और महिला प्रदर्शनकारियों के कपड़े फाड़े गए।
प्रधानमंत्री सदन के बाहर बोल सकते हैं तो अंदर क्यों नहीं?
अखिलेश यादव ने कहा कि सवाल यह है कि छात्रों के साथ कैसा बर्ताव किया गया।” यह मुद्दा मंत्रियों के इस्तीफ़े की मांग से कहीं ज़्यादा बड़ा है। “सरकार जब चाहे इस्तीफ़ा मांग सकती है। लेकिन क्या प्रधानमंत्री युवाओं के लिए कोई बयान नहीं दे सकते? अगर वह सदन के बाहर बोल सकते हैं, तो संसद के अंदर क्यों नहीं बोल सकते?”
