NEET-UG पेपर लीक के बाद देश में Gen-Z की एकजुट आवाज ने केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने के लिए आखिरकार झुका ही दिया है। सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) प्रमुख अभिजीत दिपके द्वारा जंतर मंतर मुख्य आंदोलन 20 जून 2026 को शुरू कर छात्रों को एकजुट करने में सफलता हांसिल की। लेकिन इसकी गूंज एक बड़े आंदोलन के रूप में 20 जुलाई 2026 को संसद मार्च के दौरान देखने को मिली। लाठियां खाई, आंसू गैस के गोलो का सामना किया। लेकिन उसके बावजूद प्रदर्शन की आवाज देश के अन्य राज्यों में भी उठी। ऐसे में विपक्ष की तरफ से संसद से सड़क तक इस आंदोलन की आवाज को तेज किया गया। सदन में मामले को गंभीरता से रखा गया। ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि Gen-Z की आवाज इतनी बुलंद हुई कि देश की सरकार के बड़े मंत्री को उनकी मांगों को आगे झुकना पड़ा।
धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा पत्र

धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया के जरिए अपने इस्तीफे का ऐलान कर उसकी वजह बताई। धर्मेंद्र प्रधान ने एक पत्र में लिखा कि बीते 4 दशक से ज्यादा समय से वह छात्र की शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे. उनका मानना है कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था ही किसी राष्ट्र के विकास की आधारशिला होती है. धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी कहा कि, “3 मई 2026 को आयोजित NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतें आने के बाद सरकार ने प्राथमिकता दिखाते हुए मामले की जांच करवाई। इसके बाद इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया और अगले साल से NEET को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित मोड में आयोजित करने की घोषणा की गई.
उन्हें गहरा दुख पहुंचा
धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा निष्पक्ष और सुचारु रूप से कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता थी. इसके लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, छात्रों और अभिभावकों के सहयोग से 21 जून 2026 को दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित की गई. 16 जुलाई को घोषित परिणामों में गरीब और वंचित परिवारों के कई प्रतिभाशाली छात्रों को सफलता मिली, लेकिन कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने की कोशिश की, जिससे उन्हें गहरा दुख पहुंचा.
इस्तीफे के बाद खुशी से नाचे CJP संस्थापक व छात्र
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के साथ मिलकर छात्र खुशी से नाचने लगे।
